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गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
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PostPosted: Wed Feb 03, 2010 11:09 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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हसरतो के बदल फिर से छाने लगे है.
वो ख्यालो में फिर मेरे आने लगे है

मौसम बहारो का नहीं है फिर भी
गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है

कोई न कोई बात है उनके दिल में
हमारी गली में जो वो आने लगे है

बिना पिए ही जाने किसके असर से
कदम उनके अब डगमगाने लगे है

निगाहों में उनकी जाने कैसी कशिश है
ख्याल उन तक ही बस जाने लगे है

जो किया ‘सखी’ उनसे सवाल हमने
नए नए बहाने कई वो बनाने लगे है.....१०.४६ ....३/२/१०

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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Thu Feb 04, 2010 5:03 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:37 pm
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bahut hi sundar likha hai apne... ek bahut hi acchi rachana...


कोई न कोई बात है उनके दिल में
हमारी गली में जो वो आने लगे है

hmm koi na koi baat to hogi hi :)


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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Thu Feb 04, 2010 5:10 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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itara ji shukriyaa

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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Sat Feb 13, 2010 10:27 pm 
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Joined: Wed Dec 24, 2008 6:52 am
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कोई न कोई बात है उनके दिल में
हमारी गली में जो वो आने लगे है

बिना पिए ही जाने किसके असर से
कदम उनके अब डगमगाने लगे है



bahut khoob kya gazal hai lagata hai kuchh khas hp raha hai


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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Sun Feb 14, 2010 1:48 pm 
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Joined: Tue Dec 23, 2008 3:28 pm
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sakhi wrote:

जो किया ‘सखी’ उनसे सवाल हमने
नए नए बहाने कई वो बनाने लगे है.....१०.४६ ....३/२/१०


:)

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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Fri Feb 26, 2010 2:22 pm 
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Joined: Sat Dec 20, 2008 12:48 am
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sakhi wrote:
हसरतो के बदल फिर से छाने लगे है.
वो ख्यालो में फिर मेरे आने लगे है

मौसम बहारो का नहीं है फिर भी
गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है

कोई न कोई बात है उनके दिल में
हमारी गली में जो वो आने लगे है

बिना पिए ही जाने किसके असर से
कदम उनके अब डगमगाने लगे है

निगाहों में उनकी जाने कैसी कशिश है
ख्याल उन तक ही बस जाने लगे है

जो किया ‘सखी’ उनसे सवाल हमने
नए नए बहाने कई वो बनाने लगे है.....१०.४६ ....३/२/१०

kya baat ha good


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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Sat Feb 27, 2010 11:13 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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yadain wrote:
sakhi wrote:

जो किया ‘सखी’ उनसे सवाल हमने
नए नए बहाने कई वो बनाने लगे है.....१०.४६ ....३/२/१०


:)




shukriya

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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Sat Feb 27, 2010 11:42 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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dbs wrote:
sakhi wrote:
हसरतो के बदल फिर से छाने लगे है.
वो ख्यालो में फिर मेरे आने लगे है

मौसम बहारो का नहीं है फिर भी
गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है

कोई न कोई बात है उनके दिल में
हमारी गली में जो वो आने लगे है

बिना पिए ही जाने किसके असर से
कदम उनके अब डगमगाने लगे है

निगाहों में उनकी जाने कैसी कशिश है
ख्याल उन तक ही बस जाने लगे है

जो किया ‘सखी’ उनसे सवाल हमने
नए नए बहाने कई वो बनाने लगे है.....१०.४६ ....३/२/१०

kya baat ha good


शुक्रिया हमेशा

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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Mon Mar 01, 2010 3:56 pm 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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Quote:
मौसम बहारो का नहीं है फिर भी
गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है


wah ji

aji ishq main aisa hi hota hai ji..............ji bhut hi sona likha hai ji :)


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Re: गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है
PostPosted: Sun Mar 07, 2010 10:06 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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jassi wrote:
Quote:
मौसम बहारो का नहीं है फिर भी
गुल पतझड़ में खुशबू बिखराने लगे है


wah ji

aji ishq main aisa hi hota hai ji..............ji bhut hi sona likha hai ji :)

shukriya jassi dear

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