All times are UTC + 5:30 hours




Post new topic Reply to topic  [ 12 posts ]  Go to page Previous  1, 2
  Print view

Re: कर्म और किस्मत
Author Message
PostPosted: Sun Sep 20, 2009 11:21 pm 
Moderators
Offline

Joined: Tue Dec 23, 2008 12:22 am
Posts: 68
Location: JABALPUR
निर्झरनीर जी
नमस्कार

बहुत ही सुंदर रचना है आपकी;
बिल्कुल सीधे दिल की गहराई में उतरती चली गयी.
यूँ ही लिखते रहें.
बधाई.

- विजय


Top
 Profile  
 

Re: कर्म और किस्मत
PostPosted: Fri Nov 06, 2009 10:14 pm 
Offline

Joined: Sat Dec 20, 2008 12:48 am
Posts: 295
nirjharneer wrote:
हम भी चले थे शौक से
थी जिधर मंजिल मेरी
दिल में था जोश-ओ-जुनूं
और ख्वाब थे दौलत मेरी ।

नभ पे थी मेरी निगाहें
उड़ने की चाहत मेरी
होसलों के पंख थे और
साथ थी हिम्मत मेरी ।

राह में पर्वत थे ऊँचे
दूर थी मंजिल मेरी
तूफ़ान पीछे रह गए
थी चाल कुछ ऐसी मेरी

थी मोहब्बत की सजा
या बद'नसीबी ये मेरी
फल कहो कर्मो का मेरे
या कहो किस्मत मेरी ।

जिस जगह से एक कदम पर
मुझसे थी मंजिल मेरी
उस जगह पर ही खुदा ने
छीन ली आँखें मेरी ।।

very nice


Top
 Profile  
 

Display posts from previous:  Sort by  
Post new topic Reply to topic  [ 12 posts ]  Go to page Previous  1, 2

All times are UTC + 5:30 hours


Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 1 guest


You cannot post new topics in this forum
You cannot reply to topics in this forum
You cannot edit your posts in this forum
You cannot delete your posts in this forum

Search for:
Jump to:  
cron

Powered by phpBB © 2000, 2002, 2005, 2007 phpBB Group
© 2008, 2009,2010 Mahaktepal.com
Website is maintained by Gensofts (Web Design Company India)