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महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी न
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PostPosted: Mon Mar 01, 2010 3:53 pm 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी नहीं होती
मिजाज ए गम पहचान है हमारी ,सुना है उनको ख़ुशी से भी ख़ुशी नहीं होती

ये दिल भी सहारा आंधी का लिए हुए ,खो गया है यादो में उनकी इस क़दर से
दिल को गम ए दायात गवारा है ,सुना है उनके दिल में कोई महकशी नहीं होती

जिंदगी को मौत कह देना कोई मुश्किल नहीं ,गौर से देख ले अपनी जिंदगी को
एहले दिल को जिंदगी भी प्यारी है ,सुना है उनकी जिंदगी भी जिंदगी नहीं होती

कोई पिला रहा है तो वो पिए जा रहे हैं,महफ़िल ए शराब ए जिंदगी को गले लगा के
हम भी पिला दे मोहब्बत ए जाम लेकिन,सुना है उनको पिने से भी कोई ख़ुशी नहीं होती

वो इस दौर सहमे हुए कहते हैं अब तो हमे थौड़ी सी बस तब्बसुम की ज़रुरत है
ए दिल तुझे तब्बसुम कैसे दे दे हम,सुना है उनके फूलो में कोई खुश्बुई नहीं होती

हाल ए दिल की दास्ताँ क्या सुनाये हम ,घर की चार दीवारी घुटनों पे सर रखने के सिवा
आंसू भी शब् भर बरसात ही करते रहेंगे ,सुना है उनकी आँखों में नमी भी नहीं होती

मेरे आशारों में सदा तो तुम्हरी ही रहती है ,ये पढने वाले महसूस करे या ना कर पाए
उनको याद करते हुए शाएरी लिखती है आनामिका,सुना है उनको पढने की कमी नहीं होती


Annnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnamika


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Re: महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी न
PostPosted: Wed Mar 03, 2010 11:08 am 
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Joined: Tue Dec 23, 2008 3:28 pm
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jassi wrote:
महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी नहीं होती
मिजाज ए गम पहचान है हमारी ,सुना है उनको ख़ुशी से भी ख़ुशी नहीं होती

ये दिल भी सहारा आंधी का लिए हुए ,खो गया है यादो में उनकी इस क़दर से
दिल को गम ए दायात गवारा है ,सुना है उनके दिल में कोई महकशी नहीं होती

जिंदगी को मौत कह देना कोई मुश्किल नहीं ,गौर से देख ले अपनी जिंदगी को
एहले दिल को जिंदगी भी प्यारी है ,सुना है उनकी जिंदगी भी जिंदगी नहीं होती

कोई पिला रहा है तो वो पिए जा रहे हैं,महफ़िल ए शराब ए जिंदगी को गले लगा के
हम भी पिला दे मोहब्बत ए जाम लेकिन,सुना है उनको पिने से भी कोई ख़ुशी नहीं होती

वो इस दौर सहमे हुए कहते हैं अब तो हमे थौड़ी सी बस तब्बसुम की ज़रुरत है
ए दिल तुझे तब्बसुम कैसे दे दे हम,सुना है उनके फूलो में कोई खुश्बुई नहीं होती

हाल ए दिल की दास्ताँ क्या सुनाये हम ,घर की चार दीवारी घुटनों पे सर रखने के सिवा
आंसू भी शब् भर बरसात ही करते रहेंगे ,सुना है उनकी आँखों में नमी भी नहीं होती

मेरे आशारों में सदा तो तुम्हरी ही रहती है ,ये पढने वाले महसूस करे या ना कर पाए
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Re: महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी न
PostPosted: Thu Mar 04, 2010 12:04 am 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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jassi dear

bahut acha likha hai apne..
magar she bhaut labme lag rahe hai unko thoda chhota hi rakha karo

:) sakhi

_________________
kuch pal sanjoye hai yado se lekar
unko sahejaa hai kalam se kah kar


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Re: महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी न
PostPosted: Thu Mar 04, 2010 9:00 am 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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yadain wrote:
jassi wrote:
महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी नहीं होती
मिजाज ए गम पहचान है हमारी ,सुना है उनको ख़ुशी से भी ख़ुशी नहीं होती

ये दिल भी सहारा आंधी का लिए हुए ,खो गया है यादो में उनकी इस क़दर से
दिल को गम ए दायात गवारा है ,सुना है उनके दिल में कोई महकशी नहीं होती

जिंदगी को मौत कह देना कोई मुश्किल नहीं ,गौर से देख ले अपनी जिंदगी को
एहले दिल को जिंदगी भी प्यारी है ,सुना है उनकी जिंदगी भी जिंदगी नहीं होती

कोई पिला रहा है तो वो पिए जा रहे हैं,महफ़िल ए शराब ए जिंदगी को गले लगा के
हम भी पिला दे मोहब्बत ए जाम लेकिन,सुना है उनको पिने से भी कोई ख़ुशी नहीं होती

वो इस दौर सहमे हुए कहते हैं अब तो हमे थौड़ी सी बस तब्बसुम की ज़रुरत है
ए दिल तुझे तब्बसुम कैसे दे दे हम,सुना है उनके फूलो में कोई खुश्बुई नहीं होती

हाल ए दिल की दास्ताँ क्या सुनाये हम ,घर की चार दीवारी घुटनों पे सर रखने के सिवा
आंसू भी शब् भर बरसात ही करते रहेंगे ,सुना है उनकी आँखों में नमी भी नहीं होती

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shukeriya ji


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Re: महफ़िल में चिराग बन के जलते रहे ,सुना है उनके घर में रौशनी न
PostPosted: Thu Mar 04, 2010 9:01 am 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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sakhi wrote:
jassi dear

bahut acha likha hai apne..
magar she bhaut labme lag rahe hai unko thoda chhota hi rakha karo

:) sakhi

sakhi maine ye ghazal badi beher mai likhi hai....so iske shere chote kaise ho skate the....maine bhut time ke bad badhi beher mai likha hai

shukeriya ji


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