All times are UTC + 5:30 hours




Post new topic Reply to topic  [ 5 posts ] 
  Print view

फिर कातिल कोन हैं???????
Author Message
PostPosted: Mon Feb 22, 2010 9:37 pm 
User avatar
Offline

Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
Posts: 358
हुआ बेटा तो ढोल बज गया
हुई बेटी तो मातम सज गया

ये कैसा समाज है अपना

सोचिये .....

क्या हम कातिल हैं ?????

बेटी जिसकी गर्भ मैं ही
हत्या कर दी जाती है
दहेज़ के लालच मैं
जिंदा जला दी जाती है

सोचिये

औरत क्या है ...

वो एक बेटी है
वो एक बहन है
वो एक पत्नी है
वो एक माँ है

सोचिये
सन २००७ में
१०० लडको की तुलना में
केवल ८० लडकिय थी
सन २०१० में
१०० लडको को तुलना में
३० रह जाएँगी
अगर ये सिलसिला ऐसा ही चलता रहा तो

सोचिये

बचपन ममता के बगैर
घर पत्नी के बगैर
समाज औरत के बगैर

ज़रा सोचिये
हम कातिल नहीं हैं
फिर क्यों हम
बेटी भ्रूण हत्या करते हैं

बेटी जगत जननी है
वो इस देश का मान है
फिर क्यों हम इसे नहीं अपनाते ?
क्यों बेटी को बराबर के अधिकार नहीं देते?
क्यों इसका सम्मान नहीं करते औरत का ?

मगर हम कातिल नहीं
फिर कातिल कोन हैं???????

सोचो .........और सोच अपनी बदलो
जब प्रभु एक है
और वो लड़का और लड़की में
फर्क नहीं करता
फिर हम क्यों करते हैं?

सोचिये ............और सोच अपनी बदलिए


Top
 Profile  
 

Re: फिर कातिल कोन हैं???????
PostPosted: Mon Feb 22, 2010 10:43 pm 
User avatar
Offline

Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
Posts: 2493
सोचिये

बचपन ममता के बगैर
घर पत्नी के बगैर
समाज औरत के बगैर

ज़रा सोचिये
हम कातिल नहीं हैं


jarur katil hai wo log jo ek beti ko janam hi nahi lene dete...

bina aurat ke kuch nahi hai jeevan..aurat jeevan dayni hai sab jante hai magar aaj kal is bat ko bhul sab kanya ko janam hi nahi lene dete hai..wo samaaj ke doshi hai aaj nahi to kal avshay iska nukshan is samaaj ko hoga

_________________
kuch pal sanjoye hai yado se lekar
unko sahejaa hai kalam se kah kar


Top
 Profile  
 

Re: फिर कातिल कोन हैं???????
PostPosted: Tue Feb 23, 2010 10:15 pm 
Offline

Joined: Sat Dec 20, 2008 12:48 am
Posts: 295
jassi wrote:
हुआ बेटा तो ढोल बज गया
हुई बेटी तो मातम सज गया

ये कैसा समाज है अपना

सोचिये .....

क्या हम कातिल हैं ?????

बेटी जिसकी गर्भ मैं ही
हत्या कर दी जाती है
दहेज़ के लालच मैं
जिंदा जला दी जाती है

सोचिये

औरत क्या है ...

वो एक बेटी है
वो एक बहन है
वो एक पत्नी है
वो एक माँ है

सोचिये
सन २००७ में
१०० लडको की तुलना में
केवल ८० लडकिय थी
सन २०१० में
१०० लडको को तुलना में
३० रह जाएँगी
अगर ये सिलसिला ऐसा ही चलता रहा तो

सोचिये

बचपन ममता के बगैर
घर पत्नी के बगैर
समाज औरत के बगैर

ज़रा सोचिये
हम कातिल नहीं हैं
फिर क्यों हम
बेटी भ्रूण हत्या करते हैं

बेटी जगत जननी है
वो इस देश का मान है
फिर क्यों हम इसे नहीं अपनाते ?
क्यों बेटी को बराबर के अधिकार नहीं देते?
क्यों इसका सम्मान नहीं करते औरत का ?

मगर हम कातिल नहीं
फिर कातिल कोन हैं???????

सोचो .........और सोच अपनी बदलो
जब प्रभु एक है
और वो लड़का और लड़की में
फर्क नहीं करता
फिर हम क्यों करते हैं?

सोचिये ............और सोच अपनी बदलिए

acha likha ha good


Top
 Profile  
 

Re: फिर कातिल कोन हैं???????
PostPosted: Mon Mar 01, 2010 3:51 pm 
User avatar
Offline

Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
Posts: 358
sakhi wrote:
सोचिये

बचपन ममता के बगैर
घर पत्नी के बगैर
समाज औरत के बगैर

ज़रा सोचिये
हम कातिल नहीं हैं


jarur katil hai wo log jo ek beti ko janam hi nahi lene dete...

bina aurat ke kuch nahi hai jeevan..aurat jeevan dayni hai sab jante hai magar aaj kal is bat ko bhul sab kanya ko janam hi nahi lene dete hai..wo samaaj ke doshi hai aaj nahi to kal avshay iska nukshan is samaaj ko hoga


i agree with u dear

shukeriya


Top
 Profile  
 

Re: फिर कातिल कोन हैं???????
PostPosted: Mon Mar 01, 2010 3:51 pm 
User avatar
Offline

Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
Posts: 358
dbs wrote:
jassi wrote:
हुआ बेटा तो ढोल बज गया
हुई बेटी तो मातम सज गया

ये कैसा समाज है अपना

सोचिये .....

क्या हम कातिल हैं ?????

बेटी जिसकी गर्भ मैं ही
हत्या कर दी जाती है
दहेज़ के लालच मैं
जिंदा जला दी जाती है

सोचिये

औरत क्या है ...

वो एक बेटी है
वो एक बहन है
वो एक पत्नी है
वो एक माँ है

सोचिये
सन २००७ में
१०० लडको की तुलना में
केवल ८० लडकिय थी
सन २०१० में
१०० लडको को तुलना में
३० रह जाएँगी
अगर ये सिलसिला ऐसा ही चलता रहा तो

सोचिये

बचपन ममता के बगैर
घर पत्नी के बगैर
समाज औरत के बगैर

ज़रा सोचिये
हम कातिल नहीं हैं
फिर क्यों हम
बेटी भ्रूण हत्या करते हैं

बेटी जगत जननी है
वो इस देश का मान है
फिर क्यों हम इसे नहीं अपनाते ?
क्यों बेटी को बराबर के अधिकार नहीं देते?
क्यों इसका सम्मान नहीं करते औरत का ?

मगर हम कातिल नहीं
फिर कातिल कोन हैं???????

सोचो .........और सोच अपनी बदलो
जब प्रभु एक है
और वो लड़का और लड़की में
फर्क नहीं करता
फिर हम क्यों करते हैं?

सोचिये ............और सोच अपनी बदलिए

acha likha ha good



shukeriya ji


Top
 Profile  
 

Display posts from previous:  Sort by  
Post new topic Reply to topic  [ 5 posts ] 

All times are UTC + 5:30 hours


Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 1 guest


You cannot post new topics in this forum
You cannot reply to topics in this forum
You cannot edit your posts in this forum
You cannot delete your posts in this forum

Search for:
Jump to:  
cron

Powered by phpBB © 2000, 2002, 2005, 2007 phpBB Group
© 2008, 2009,2010 Mahaktepal.com
Website is maintained by Gensofts (Web Design Company India)