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दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई
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PostPosted: Fri Feb 12, 2010 9:54 pm 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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[*]मुस्कुराती हुई आँखों को रुला रहा है कोई
दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई


दोस्तों का जो साथ हो मंजिल आसान हो
अकेले ही दिल्लगी का विश पिला रहा है कोई

में तुमे भूल कर भी कभी याद ना करूँ अब
लेकिन बेवफाई की बातें याद दिला रहा है कोई

में भटकती फिर रही हूँ दर ब दर इस तरह से
जिस तरह से तनहाइयों का काफ्ला रहा है कोई

किसके दामन में नहीं होती हैं यहाँ मायूसियाँ
मेरे दिल पे ही क्यों दर्द का पहरा रहा है कोई

जो आह उठती है सीने में सौतन बन कर ऐसे
तेरी राहों में आंसू लिए जीना भूला रहा है कोई

लोग पढ़ लेते हैं चहरे से तन्हाई मेरे दिल की
ऐसे आलम में राज़ दिल के छिपा रहा है कोई

दिल टूटने पर भी अब भी कुछ रिश्ते बाकी हैं
प्रेम पयार से भी मेरा नाता छुड़ा रहा है कोई

शाम भी किसी सोंग में डूब गई पर्तीत हो जैसे
इसकी तन्हाई में गुजरे पल दिखा रहा है कोई

वफ़ा की राह पे चलते हुए ना जाने क्यों गिरा दिया
ना जाने क्यों बर्बादी की खाई बना रहा है कोई

उस मुकदर के संवरने की दुआ क्या मांगे "आना"
जो मेरे चाहत ए करम से भी तोबा करा रहा है कोई


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Re: दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई
PostPosted: Fri Feb 12, 2010 11:12 pm 
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Joined: Tue Dec 16, 2008 11:36 pm
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दिल टूटने पर भी अब भी कुछ रिश्ते बाकी हैं
प्रेम पयार से भी मेरा नाता छुड़ा रहा है कोई

..आना जी...

शेर बहुत अच्छा लगा....

मगर प्यार तो सदैव साथ है हर रिश्ते में..और दिल टूटना सिर्फ अक्सर एक रिश्ते की निशानी है मगर रिश्ते बहुत सारे हमारे साथ जिंदगी में हालते है जिनके साथ हमें खुशी भी मिलती है और जीना भी होता है.

_________________
kuch pal sanjoye hai yado se lekar
unko sahejaa hai kalam se kah kar


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Re: दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई
PostPosted: Sat Feb 13, 2010 7:19 am 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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shukeriya ji...ha shai kaha apne sakhi ji :)


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Re: दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई
PostPosted: Sun Feb 14, 2010 6:38 pm 
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Joined: Tue Dec 23, 2008 3:28 pm
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jassi wrote:
[*]मुस्कुराती हुई आँखों को रुला रहा है कोई
दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई


दोस्तों का जो साथ हो मंजिल आसान हो
अकेले ही दिल्लगी का विश पिला रहा है कोई

में तुमे भूल कर भी कभी याद ना करूँ अब
लेकिन बेवफाई की बातें याद दिला रहा है कोई

में भटकती फिर रही हूँ दर ब दर इस तरह से
जिस तरह से तनहाइयों का काफ्ला रहा है कोई

किसके दामन में नहीं होती हैं यहाँ मायूसियाँ
मेरे दिल पे ही क्यों दर्द का पहरा रहा है कोई

जो आह उठती है सीने में सौतन बन कर ऐसे
तेरी राहों में आंसू लिए जीना भूला रहा है कोई

लोग पढ़ लेते हैं चहरे से तन्हाई मेरे दिल की
ऐसे आलम में राज़ दिल के छिपा रहा है कोई

दिल टूटने पर भी अब भी कुछ रिश्ते बाकी हैं
प्रेम पयार से भी मेरा नाता छुड़ा रहा है कोई

शाम भी किसी सोंग में डूब गई पर्तीत हो जैसे
इसकी तन्हाई में गुजरे पल दिखा रहा है कोई

वफ़ा की राह पे चलते हुए ना जाने क्यों गिरा दिया
ना जाने क्यों बर्बादी की खाई बना रहा है कोई

उस मुकदर के संवरने की दुआ क्या मांगे "आना"
जो मेरे चाहत ए करम से भी तोबा करा रहा है कोई


Nice Jassi ji,
Ehsason o kah liya aapne.................

_________________
------------------------------------------------------------------
" Yadain "
" Batain Bhool Jati hain, Yadain yaad aati hain"


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Re: दाग दामन के मेरे दिल से छुपा रहा है कोंई
PostPosted: Wed Feb 17, 2010 1:18 pm 
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Joined: Tue Nov 17, 2009 12:51 pm
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shukeriy ji


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