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न कमरा जान पाता है (Munavvar Rana Saheb)
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Author:  dheerendra [ Wed Nov 03, 2010 5:43 pm ]
Post subject:  न कमरा जान पाता है (Munavvar Rana Saheb)

न कमरा जान पाता है, न अँगनाई समझती है
कहाँ देवर का दिल अटका है भौजाई समझती है

हमारे और उसके बीच एक धागे का रिश्ता है
हमें लेकिन हमेशा वो सगा भाई समझती है


तमाशा बन के रह जाओगे तुम भी सबकी नज़रों में
ये दुनिया दिल के टाँकों को भी तुरपाई समझती है

नहीं तो रास्ता तकने आँखें बह गईं होतीं
कहाँ तक साथ देना है ये बीनाई [1]समझती है

मैं हर ऐज़ाज़[2]को अपने हुनर[3]से कम समझता हूँ
हुक़ुमत[4]भीख देने को भी भरपाई समझती है

हमारी बेबसी[5]पर ये दरो-दीवार रोते हैं
हमारी छटपटाहट क़ैद-ए-तन्हाई समझती है

अगर तू ख़ुद नहीं आता तो तेरी याद ही आए
बहुत तन्हा हमें कुछ दिन से तन्हाई समझती है



शब्दार्थ:

↑ दृष्टि
↑ पुरस्कार
↑ निपुणता
↑ शासन
↑ लाचारी

------------ Munavvar Rana

Author:  yadain [ Fri Nov 12, 2010 12:29 pm ]
Post subject:  Re: न कमरा जान पाता है (Munavvar Rana Saheb)

dheerendra wrote:
न कमरा जान पाता है, न अँगनाई समझती है
कहाँ देवर का दिल अटका है भौजाई समझती है

हमारे और उसके बीच एक धागे का रिश्ता है
हमें लेकिन हमेशा वो सगा भाई समझती है


तमाशा बन के रह जाओगे तुम भी सबकी नज़रों में
ये दुनिया दिल के टाँकों को भी तुरपाई समझती है

नहीं तो रास्ता तकने आँखें बह गईं होतीं
कहाँ तक साथ देना है ये बीनाई [1]समझती है

मैं हर ऐज़ाज़[2]को अपने हुनर[3]से कम समझता हूँ
हुक़ुमत[4]भीख देने को भी भरपाई समझती है

हमारी बेबसी[5]पर ये दरो-दीवार रोते हैं
हमारी छटपटाहट क़ैद-ए-तन्हाई समझती है

अगर तू ख़ुद नहीं आता तो तेरी याद ही आए
बहुत तन्हा हमें कुछ दिन से तन्हाई समझती है



शब्दार्थ:

↑ दृष्टि
↑ पुरस्कार
↑ निपुणता
↑ शासन
↑ लाचारी

------------ Munavvar Rana

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